Loksabha Election 2019 : यूं ही नहीं बनाई बसपा की मुखिया मायावती ने कांग्रेस से दूरी

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Jagran

Publish Date:Thu, 14 Mar 2019

बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से किसी भी राज्य में गठबंधन अथवा कोई तालमेल नहीं करने का एलान यूं ही नहीं किया। दरअसल वर्ष 1996 में कांग्रेस से किया गठबंधन प्रयोग बसपा के लिए फायदे का सौदा नहीं रहा। वहीं वोट बैंक खिसकने का डर भी बसपा को सताता रहा है। इसके चलते ही गत तीन दशकों से दलितों पर एकाधिकार रख कर चार बार मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने वालीं मायावती अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाए रखने के लिए फ्रिकमंद हैं।

वर्ष 1996 के विधान सभा चुनाव में बसपा को कांग्रेस से गठबंधन का कोई खास फायदा नहीं हुआ। बसपा कांग्रेस गठबंधन ने तब 67 सीटों पर ही जीत हासिल की थी। कांग्रेस को 29.13 प्रतिशत वोटों के साथ कुल 33 सीटों पर जीत मिली जबकि 34 सीटें बसपा के खाते में गई थी। वोट प्रतिशत के नजरिए से सीधा लाभ कांग्रेस को हुआ लेकिन, बसपा को कोई खास फायदा नहीं हो सका। हालांकि बसपा अपने दलित वोट बैंक को बचाने में कामयाब रही।

कांग्रेस के वरिष्ठ दलित नेता व पूर्व विधायक बंशी पहाड़िया का कहना है कि बसपा का उदय कांग्रेस से खिसके दलित वोटबैंक पर ही हुआ। बसपा के ताकतवर होने के बाद दलितों का रुख कांग्रेस की ओर न हो सका। अब गत दो चुनावों (लोकसभा व विधानसभा) से बसपा का ग्राफ गिरता जा रहा है। ऐसे में दलित वोटों पर कांग्रेस के साथ भाजपा की निगाह भी लगी है। ऐसे में कांग्रेस में प्रियंका गांधी की सक्रियता बढऩे से बसपा को अपना बेस वोटबैंक खिसकने का खतरा और अधिक बढ़ा है।

उधर, भीम आर्मी जैसे संगठनों की दलितों में तेजी से बढ़ती लोकप्रियता भी बसपा की बेचैनी बढ़ाए है। बदले सियासी हालात ने बसपा को सपा से हाथ मिलाने के लिए भी मजबूर कर दिया है।